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कुड़मी–कुरमी को एसटी दर्जा देने की मांग के विरोध में रैली, राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन

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संताल परगना समन्वय समिति ने कहा – यह मांग असंवैधानिक और ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत

दुमका। कुड़मी–कुरमी जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में सोमवार को संताल परगना समन्वय समिति की ओर से एक विशाल रैली निकाली गई। रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए पुराने समाहरणालय परिसर पहुंची, जहां यह सभा में परिवर्तित हो गई।

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सभा में उठी विरोध की आवाज

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कुड़मी–कुरमी समाज की ओर से एसटी दर्जा पाने की जो मांग की जा रही है, वह असंवैधानिक और ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है। वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल होने के लिए केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए पांच मापदंडों पर कुड़मी–कुरमी जाति खरा नहीं उतरती। समिति के सदस्यों ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में इस मांग को खारिज कर दिया था, बावजूद इसके कुछ संगठन झूठे इतिहास और फर्जी तर्कों के आधार पर आंदोलन कर रहे हैं।

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राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन

सभा के उपरांत समिति के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्पष्ट मांग की गई कि कुड़मी–कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल न किया जाए। समिति ने कहा कि इससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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आंदोलन को बताया ‘फर्जी इतिहास रचने का प्रयास’

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि रेल टेका आंदोलन समेत अन्य आंदोलनों के माध्यम से कुड़मी–कुरमी संगठनों द्वारा समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास आदिवासी अस्मिता पर सीधा प्रहार है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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कार्यक्रम में कई प्रतिनिधि रहे मौजूद

रैली और सभा में समिति के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस दौरान श्यामदेव हेम्ब्रम, राजीव बास्की, निखिल मुर्मू, रोहित मुर्मू, दास सोरेन, सरोज सोरेन सहित अन्य सदस्य मौजूद थे। समिति की स्पष्ट मांग: “कुड़मी–कुरमी जाति की असंवैधानिक मांग को केंद्र और राज्य सरकार तत्काल खारिज करे, ताकि झारखंड की जनजातीय पहचान और अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

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