कमरू देश से बुलाया गया चाड़चाड़ी बोंगा, तरुप बोंगा, हाडू बोंगा
- SANTHAL PARGANA KHABAR
- Sep 28, 2025
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दुमका के दिसोम मांझी थान में मनाया गया बेलबोरोन पूजा
दुमका। दिसोम मांझी बाबा बीनीलाल टुडू की अध्यक्षता में दुमका के दिसोम मांझी थान में दिसोम बेलबोरोन पूजा धूमधाम से मनाया गया। सर्वप्रथम गुरु बाबा लुखीराम टुडू ने गोसाई ऐरा को मुर्गा की बलि देकर पूजा की। इसके बाद सभी देवी देवताओं की भी नमन किया। बेलबोरोन पूजा गुरु शिष्य का पर्व है। पूर्वजों के कथनानुसार शिष्य अपने गुरु बाबा से विभिन्न प्रकार के झड़नी, मंतर, जड़ी-बूटी दवाई कई दिनों से दिखते हैं। सीखने के बाद बेलबोरोन के दिन ही गुरु अपने शिष्यों को सिद्धि देते हैं। सिद्धि देने के बाद गुरु बाबा अपने शिष्यों को गांव में घर-घर नाचते गाते हैं, और सभी घर के लोग मकई, धान या कुछ दान के रूप में देते हैं। सभी घर में मनोरंज के लिए कमरू देश से चाड़चाड़ी बोंगा, तरुप बोंगा, हाडू बोंगा, बिंदी बोंगा आदि को बुलाकर दिखाते हैं और मनोरंज कराते हैं। दिसोम मांझी थान में नाच गान के साथ बोंगा दिखा कर मनोरंज कराया गया। इस अवसर पर संताल परगना जिलों से पारंपरिक वेश भुषा में आये संथाल महिला-पुरूषों ने पूजा एवं सामुहिक नृत्य में हिस्सा लिया। इस आयोजन को सफल करने में सुरेश चंद्र सोरेन, इमेल मरांडी, लैंद मुर्मू, सीताराम सोरेन,रामप्रसाद हांसदा, सनातन किस्कू, रामकृष्ण हेंब्रम, मोहन टुडू,सुनील मरांडी, शनिदेवाल बेसरा, सोनेलाल मुर्मू, संदीप मुर्मू, झुमरी सोरेन, अंजनी बेसरा आदि का सराहनीय सहयोग रहा।

गुरू देते हैं मंत्र और पारंपरिक चिकित्सा विधि का ज्ञान
संथाल बेलबोरोन पूजा या दासायं परब पारंपरिक रूप से जाहेर-एरा देवी को सम्मान देने के लिए मनाते हैं। यह पर्व अच्छी फसल, समृद्धि और गांव के लिए सुख-शांति की प्रार्थना का एक रूप है, जिसमें देवता के आभूषण और वस्त्रों को धारण कर नृत्य और गीत का आयोजन किया जाता है। जाहेर-एरा देवी को समर्पित है, जो संथाल लोककथाओं में एक महत्वपूर्ण देवी हैं और जिन्होंने महिषासुर का वध किया था। पूजा के पहले नौ दिन युवा महिषासुर का पीछा करने का नाटक करते हैं, और दसवें दिन इसकी सूचना देवी को दी जाती है। पूजा से एक महीने पहले गुरु और शिष्य एक साथ आखड़ा में जुटते हैं, जहां गुरु शिष्यों को मंत्र और पारंपरिक चिकित्सा विधि का ज्ञान देते हैं। यह परब संथाल समुदाय की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उनके रीति-रिवाजों और मान्यताओं को जीवित रखता है।

जानें तेल-सिंदुर क्यों लगाते और मोरपंख लेकर क्यों नाचते हैं
संतालों के जोम सिम विनती के अनुसार, जब धरती में मनुष्यों द्वारा पाप बहुत बढ़ गया था, तो ठाकुरजी ने 12 दिन और 12 रात सेगेल दाह (अग्नि वर्षा) का आदेश दिया था क्योंकि पिलाचु हड़ाम और पिलाचु बुढ़ी की संतानें पापकर्म में व्यस्त हो गये थे। चुंकि दोनों की उत्पत्ति ठकुराईन के देह की मैल से हुई थी इसलिए उन्होंने ठाकुरजी से आग्रह किया कि वह अग्निवर्षा रोक दें क्योंकि सभी तो पाप नहीं कर रहे थे। इसपर ठाकुरजी ने उन्हें मराङ बुरु से संपर्क करने को कहा। ठकुराईन ने मराङ बुरु को बुलाकर ठाकुरजी का संदेश सुनाया कि ‘‘दोनों (ठाकुरजी और ठकुराईन) का सपाप (आभूषण और वस्त्र) मोनचोपुरी (पृथ्वी लोक) ले जाये और मनुष्य दशांय नृत्य और गीत के माध्यम हमारा गुणगान करे। मेरा सुनुम-सिंदुर (तेल-सिंदुर) ले जाये और गांव-गांव घुमाये। मेरा सपाप (आभूषण और वस्त्र) साड़ी, शंका, काजल आदि और ठाकुरजी का सपाप (आभूषण और वस्त्र) लिपुर, पैगोन, मोर पंख आदि ले जायें। कुछ लोग मेरा सपाप (आभूषण और वस्त्र) पहने और कुछ लोग ठाकुरजी का सपाप (आभूषण और वस्त्र) पहने और दशांय नृत्य और गीत के माध्यम से हमारा गुणगान करें. ऐसा करने पर ठाकुरजी खुश हो जायेंगे। उन्हें विश्वास हो जायेगा कि मनुष्य पाप छोड़ धर्म के रास्ते चल पड़ा है, तब वे मनुष्य जाति का नाश नहीं करेंगे।

मोनचोपुरी (पृथ्वीलोक) में छठे दिन अवतरित होती है देवी
ठकुराईन ने मराङ बुरु से यह भी कहा कि वे 12 गुरु बोंगाओ (गुरु देवताओं) को भी जाने के लिए कहेंगे जो अपने-अपने कार्य क्षेत्र में निपुण हैं. जैसे धोरोम गुरु बोंगा- धर्म और धन के देवता, कमरूगुरु बोंगा- रोग मुक्ति के देवता, भुवग गुरु बोंगा- नृत्य, संगीत के देवता आदि. इन सभी को घर-घर घुमायें। इससे ठकुर के माध्यम से मनुष्य जाति को खत्म करने के लिए छोड़े गए पुहह (जीवाणु/वायरस) के माध्यम से जो बीमारी फैली है वह इन गुरु बोगाओ (गुरु देवताओ) के माध्यम से खत्म हो जायेगा। इन गुरु बोगाओं (गुरु देवताओं) के माध्यम से मनुष्य बीमारियों का इलाज, दवा, जड़ी-बूटी, धर्म, तंत्र -मंत्र आदि सिखेगा. मोनचोपुरी (पृथ्वीलोक) में मनुष्य गुरु बोगाओं से गुरु-शिष्य का संबंध स्थापित कर हमारा गुणगान करें। आगे ठकुराईन ने कहा हम दशांय चांदु (दशांय संताली महीना) के छठे दिन मोनचोपुरी (पृथ्वीलोक) में गुरु बोगाओं (गुरु देवताओं) के साथ अवतरित होंगी। यही कारण है कि बेलबोरोन पूजा में धोरोम गुरु बोंगा, कमरू गुरु बोंगा, भुवग गुरु बोंगा, कांशा गुरु बोंगा चेमेय गुरु बोंगा, सिद्ध गुरुबोंगा, सिदो गुरु बोंगा, रोहोड़ गुरु बोंगा, गांडु गुरु बोंगा, भाइरोगुरु बोंगा, नरसिं गुरु बोंगा व भेंडरा गुरु बोंगा की पूजा करते हैं।





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