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अब यहां का युवा सिर्फ चढ़ेगा नहीं, हवाई जहाज उड़ाएगा भी : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

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दुमका में झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट का शुभारंभ, करोड़ों की योजनाओं का लोकार्पण

दुमका। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सोमवार को सिदो–कान्हू एयरपोर्ट, दुमका में आयोजित समारोह में राज्य के पहले “झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट” का विधिवत शुभारंभ किया। इसी दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों की 190.647 करोड़ रुपये की 12 योजनाओं का उद्घाटन और 123.48 करोड़ रुपये की 14 योजनाओं की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में सांसद नलिन सोरेन, विधायक बसंत सोरेन, प्रदीप यादव, श्रीमती लुईस मरांडी, आलोक सोरेन, जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती जॉयस लुप्सी बेसरा सहित मुख्य सचिव अविनाश कुमार और अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री ने पायलट सीट पर बैठकर देखा प्रशिक्षण सिस्टम

मुख्यमंत्री ने झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट का विस्तृत निरीक्षण भी किया। उन्होंने ग्लाइडर विमान के कॉकपिट में बैठकर उड़ान प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली को समझा। साथ ही उन्होंने क्लासरूम, सिम्युलेटर ट्रेनिंग, थ्योरी कक्षाओं, फ्लाइट ऑपरेशन और आपातकालीन प्रबंधन प्रणाली सहित प्रशिक्षण के सभी पहलुओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षुओं और कैप्टन से भी मुलाकात कर उनकी आवश्यकताओं और प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली।

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युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने की तैयारी

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का युवा अब केवल हवाई जहाज में सफर ही नहीं करेगा, बल्कि उसे उड़ाने का भी प्रशिक्षण प्राप्त करेगा। उन्होंने बताया कि फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में पहले चरण में 30 पायलटों को प्रशिक्षित किया जाएगा और इनमें से आरक्षित वर्ग के 15 पायलटों का पूरा प्रशिक्षण खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान राज्य के युवाओं के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का बड़ा अवसर लेकर आया है। यह पहल बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सपनों को साकार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

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2008 में रखी गई नींव, अब मिला नया आयाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2008 में इस संस्थान की आधारशिला रखी गई थी, लेकिन वर्षों तक इसे उपेक्षित रखा गया। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों को आगे बढ़ाने के बजाय बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इसे फिर से सक्रिय कर झारखंड के युवाओं के लिए नए भविष्य का रास्ता तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कोरोना काल में राज्य सरकार ने हवाई जहाज से हजारों प्रवासी श्रमिकों को उनके घर पहुंचाकर मानवता का परिचय दिया था और अब उन्हीं परिवारों के बच्चे पायलट बनने की राह पर हैं।

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अधिकारियों को मिली चेतावनी : कार्यशैली बदलनी होगी

मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर अब विकास की रफ्तार और तेज होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संथाल परगना से शुरू की गई विकास की लकीर राजधानी रांची और दिल्ली तक खींची जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करना होगा, अन्यथा उन्हें दंड का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अपनी कार्यशैली बदलकर पूरी ईमानदारी से जनता की सेवा करनी होगी।

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